वसीयत एक लिखित निर्देश है जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संपत्तियों और पैसे का सही वारिस तय होता है। आइये आज जानते हैं वसीयत से जुड़ी खास बातें और इसे लिखते समय कौन सी गलतियों से बचना चाहिए...

वसीयत के प्रकार

वसीयतें दो प्रकार की होती हैंः विशेषाधिकार युक्त और बिना विशेषाधिकार के। एक विशेषाधिकार युक्त वसीयत एक अनौपचारिक वसीयत होती है जिसे सिपाहियों, वायु सैनिकों और नौ-सैनिकों द्वारा बनाया जाता है जो साहसिक यात्राओं या युद्ध में गए हुए होते हैं। अन्य सभी वसीयतों को विशेषाधिकार रहित वसीयत कहा जाता है। विशेषाधिकार सहित वसीयतों को लिखित में या मौखिक घोषणा के रूप में और अपनी जान को जोखिम डालने जा रहे लोगों द्वारा एक अल्प समय के नोटिस द्वारा तैयार करवाया जा सकता है, जबकि विशेषाधिकार रहित वसीयत में औपचारिकताओं को पूरा करने की जरूरत होती है।

वसीयत को कैसे सुरक्षित रखें

भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 में वसीयत को सुरक्षित रखने का प्रावधान है। वसीयतकर्ता का नाम या उसके एजेंट का नाम लिखा हुआ वसीयत का सीलबंद लिफाफा सुरक्षा के लिए किसी भी रजिस्ट्रार के पास जमा करवाया जा सकता है।

वसीयत का पंजीकरण

वसीयत को एक सादे कागज पर तैयार किया जा सकता है और अगर उसके नीचे हस्ताक्षर किए गए हैं तो यह पूरी तरह से वैद्य होगी अर्थात इसे कानूनी रूप से रजिस्ट्रड करवाना अनिवार्य नहीं है। लेकिन इसकी वास्तविकता पर संदेहों से बचने के लिए एक व्यक्ति इसे रजिस्ट्रड भी करवा सकता है।

अगर एक व्यक्ति अपनी वसीयत को रजिस्ट्रड करवाना चाहता है तो उसे गवाहों के साथ सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय जाना होगा। विभिन्न जिलों के लिए सब-रजिस्ट्रार होते हैं और व्यक्ति को उस रजिस्ट्रार का पता लगाना होगा जो वसीयत को रजिस्ट्रड करने में सहायता करेगा।

किन स्थितियों में वसीयत होगी बेकार

भारतीय उत्तराधिकार कानून के मुताबिक, 11 स्थितियों में आपकी वसीयत बेकार हो सकती है। इसमें एक सामान्य कारण तो यह है कि अगर संपत्ति का कोई हिस्सा ऐसे व्यक्ति को स्थानांतरित करने की बात हो, जो बतौर गवाह वसीयत पर हस्ताक्षर कर रहा हो, तो वसीयत बेकार साबित हो सकती है। कानूनी प्रावधानों के मुताबिक, अगर कोई प्रॉपर्टी उस व्यक्ति या उसके पति/पत्नी को स्थानांतरित की जा रही हो, जिसने हस्ताक्षर किया है, तब यह बेकार हो जाता है। अस्पष्ट शब्दों के चयन से भी वसीयत बेकार हो सकती है। दूसरे कारणों में वसीयत में ऐसी शर्त को शामिल करना, जो संभव नहीं हो, तब भी वसीयत के औचित्य पर सवाल खड़ा होगा।

वसीयत लिखने में करें ये 8 गलतियां

अधिकतर लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि उनकी संपत्ति का वारिस कौन होगा, लेकिन कई लोग इस बात को कागजात में दर्ज करना भूल जाते हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि इसी वजह से कई अमीरों की मौत के बाद उनके कई वारिस सामने जाते हैं और फिर लंबा कानूनी विवाद चलता रहता है। लॉरैटोडॉटकॉम के संस्थापक और सीईओ रोहन महाजन का कहना है कि स्पष्ट वसीयत बनी रहने से संपत्ति के असल हकदार को ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ती है। आइये जानते हैं कि वसीयत से जुड़ी कौन सी 8 गलतियां नहीं करनी चाहिए...

1. वसीयत होना

अगर वसीयत सही ढंग से तैयार नहीं होती है तो कानूनी वारिस को अपना दावा जताने के लिए कई तरह के दस्तावेज तैयार कराने पड़ते हैं। इस सबमें जहां उनको काफी भागदौड़ करनी पड़ती है, वहीं काफी खर्च भी हो जाता है।

2. वसीयत सही से तैयार नहीं करना

कई लोग वसीयत बनाते समय कुछ गलतियां कर देते हैं। आपको जरूरी निजी डिटेल्स जैसेस नाम, पता, स्थान और तारीख के साथ-साथ लाभार्थी का पूरा नाम, संबंध और संपत्ति का सही-सही विवरण लिखना चाहिए।

3.जानकारी विस्तार से देना

 

अपनी चल और अचल संपत्तियों की जानकारी विस्तार से दें। इसके अलावा अन्य जानकारी जैसे अपने हर बैंक खाते, लॉकर नंबर्स और प्रॉपर्टी की डिटेल्स विस्तार में लिखें। इससे किसी तरह का कन्फ्यूजन पैदा नहीं होगा।

4. वसीयत को अपडेट नहीं करना

वसीयत बनाने के बाद अगर आपकी संपत्ति या वारिस की स्थिति में कोई बदलाव होता है तो वसीयत को अपडेट करना ना भूलें।

​5. सही एग्जिक्युटर नियुक्त नहीं करना

एग्जिक्युटर वह व्यक्ति होता है, जो यह देखता है कि वसीयत में आपकी ओर से दर्ज बातों को आपकी इच्छानुसार अमली जामा पहनाया जा रहा है या नहीं। कई लोग अपनी हम उम्र के व्यक्ति या बच्चे को एग्जिक्युटर बनाते हैं जो ठीक नहीं है। इसकी जगह आपको किसी युवा को एग्जिक्युटर बनाना चाहिए।

6. नाबालिग के नाम संपत्ति करना

अगर किसी नाबालिग के नाम वसीयत तैयार करना चाहते हैं तो उसका गार्जियन भी जरूर नियुक्त करें। अगर गार्जियन नियुक्त रहता है तो वह नाबालिग के बालिग होने तक उसके केयरटेकर की भूमिका निभाता है।

7. जिंदा रहते हुए संपत्ति गिफ्ट्स करना

कई लोग यह सोचकर जिंदा रहते हुए संपत्ति का बंटवारा कर देते हैं कि मरने के बाद विवाद हो। इसका एक नुकसान यह होता है कि बच्चे माता-पिता का ठीक से ध्यान नहीं रखते हैं। वसीयत बनाने से पावर आपके हाथ में होती है।

8. अपंगता या जानलेवा बीमारी की योजना बनाना

आप किसी तरह की अपंगता का शिकार हो जाते हैं या जानलेवा बीमारी हो जाती है तो उस स्थिति में आपके स्वास्थ्य से संबंधित फैसला कौन लेगा, आप उसके बारे में भी वसीयत बना सकते हैं।